Sep 30, 2015

सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया

जिस तरह का जोश-जूनून है मोदी के लिए वो देखने लायक है. एक ज़माना था जब बाजपेयी जी बहुत प्रसिद्ध हुआ करते थे . पक्ष-विपक्ष सबसे बराबर सम्मान मिलता था.बीजेपी के एकलौते ऐसे  नेता थे जो मुझे आजतक पसंद हैं. इंदिरा गांधी ने अपने खून का आखरी बून्द भी देश के लिए दिया. ये उन्होंने कहा था.उनकी गज़ब की प्रसिद्धि थी. राजीव गांधी ने भी अपना बलिदान ही दिया. वजह जो भी हो, व्यक्तिगत कारणों से उन्हें नहीं मारा गया.मुझे याद है जब उनको बम से उड़ाया गया तो मेरे पापा लगभग रो पड़े थे.उन्होंने उस दिन ठीक से खाना भी नहीं खाया।

आज की दीवानगी का कारण  सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का जबरदस्त बाज़ारीकरण है. रियलिटी शो जैसा चलने की होड़ है. इसमें कई बार एक बेकार सी, ना अहमियत वाली न्यूज़ भी दिन भर-रात भर ब्रेकिंग न्यूज़ बनी रहती है. जबकि उस समय तो केवल रेडियो था ज्यादातर के पास. उस समय यदि ये सब होता तो नेहरू, इंदिरा और राजीव के लिए दीवानगी देखने लायक होती।

यह गला फाड़-फाड़ कर बताया जा रहा है की कांग्रेस ने केवल बर्बाद किया है,लूटा है. मैं नहीं मानता। मेरे गावं और उसके आस पास के सब गरीब गुरबा का घर इंदिरा आवास से बना है. मैं IIT Kharagpur से पढ़ा हूँ जो नेहरू का सपना था. मैं JNV Gopalganj से पढ़ा हूँ, जो राजीव जी का सपना था.

एक वाक्या है. जब राजीव के मन में नवोदय का प्लान आया तब तत्कालीन शिक्षा मंत्री को देर शाम को या रात को बुलाया और कहा की इसे लागु करो. बस 5 मिनट में गावं के 75% छात्रों का भविष्य अच्छा करने का फरमान जारी हो गया. उस सपने की एक उपज, ये लिख रहा है. मेरे गावं और वहां के आसपास का रोड भी चकाचक है. वो भी इनकी ही देन  है शायद ! 

आजकल मेरे बिजली का बिल आधा आता है. पानी का बिल तो आता ही नही. बहुत कुछ बदल गया है. पिछले सालोँ में दिल्ली फ्लाईओवर से पट गया है. यहाँ का विवेक विहार चकाचक है. पता चला ये शीला ताई की देन है. 

कहने का मतलब ये हैं की, कुछ लोग होते हैं जो कुछ ऐसा करते हैं, जो डायरेक्टली आपको टच करता है. आप उसके मुरीद कैसे नहीं होंगे. ऐसी ही कुछ भविष्य में उम्मीद है जो मुझे जीने के बेहतर और आसान तरीके दे. ताकि मन खुश और सीना चौड़ा हो जाये।

खैर ! काश फेसबुक, ट्विटर और कानफोड़ू मीडिया उनके ज़माने में होती, तो दीवानगी की एक दो और फिल्म देखने में बड़ा मजा आता !

Sep 5, 2015

तस्मै श्री गुरुवे नमः

जब मेरा नवोदय में जाना तय हो गया था, मुझे याद है एक महीने से मेरी माँ रो रही थी.मैं अक्सर रात में पढ़ते पढ़ते सो जाया करता था। फिर वो पानी डालकर या गुदगुदी कर मुझे जगाती थी खाना खिलाने. उसे यही चिंता थी की मुझे कौन जगायेगा खाना  खाने के लिए. लेकिन मुझे गावं और गरीबी से निकलने का अवसर मिला था.मैंने इतनी छोटी उम्र में भी "पेटी " भर लिया था. 6अक्टूबर 1995 को जब आया तो बड़ा अच्छा लगा. पापा को अलविदा कह स्कूल हॉस्टल चला गया.शाम को थावें वालों का पूरा परिवार साथ देने आया था. मेरा अपना परिवार, स्कूल हो गया था. सुन्दर राजकिरण को रोते हुवे देखा तो उसे मनाने और समझाने लगा. रश्मि मैडम सब रोते बच्चों को मना रही थीं. सर लोग भी मना रहे थे। इस तरह सब बच्चों को नया घर-परिवार-मम्मी -पापा मिल गए। यही संसार सुख दुःख और बेहतर बनाने का साथी रहा 2000 तक. आजतक है. जबतक ज़िंदा हैं रहेगा।

मुझे याद है S N झा सर का सबको डांटना फटकारना दुलारना।गीता मैडम, रूपम मैडम,मुकेश सर, का ये चिंता  करना की इस निर्दयी दुनिया में ये भोला बालक कैसे गुजर बसर करेगा ? ! मुझे याद है गीता मैडम और रूपम मैडम को मुझे घसीटते हुवे मेस ड्यूटी पर ले जाना। मुझे वो फल, वो मिठाईयां, वो प्यार और मेरे लिए चिंता याद है. मेरे कांपते हाथों, धड़कते दिल को ढांढस बढ़ाना और सम्भालना याद है. रोना - रुलाना भी याद है. मेरे घर से दूर का वो दूसरा घर संसार याद है जिसने मेरे बाजुओं में इतनी ताक़त, दिल में इतना हौसला, मन में इतने अरमान, ज़िन्दगी में इतने उड़ान दिए। 

लिखता चलूँ तो आंसुओं का समंदर लिख दूँ, प्रेरणा का पर्वत लिख दूँ, प्यार-वात्सल्य का पुराण लिख दूँ। 

गीता मैडम, मुकेश सर, विनय सर, गोपाल सर, बायो सर, आर्ट सर, प्रिंसपल सर, रश्मि मैडम, रूपम मैडम, मेरे प्राथमिक विद्यालय के कमला सर, हाई स्कूल के आलम सर, IIT के समस्त गुरुजन, और बचपन में ऊँगली पकड़ कर चलना सिखाने  वाले, लिखना सिखाने  वाले, बोलना सिखाने वाले  मेरे माता - पिता, आप सबका प्यार, आशीर्वाद है की आज मैं जहाँ भी हूँ और ऊँचा उठने की तमन्ना रखता हुँ. आभार और शाष्टांग नमन !

ॐ गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु :,गुरुरेव महेश्वरः |
गुरुरेव परब्रह्म, तस्मै श्री गुरुवे नमः ||

अखण्डमण्डलाकारं, व्याप्तं येन चराचरम । 
तत्पदं दर्शितं येन, तस्मै श्री गुरुवे नमः ॥ 

मातृवत लालयित्री च, पितृवत् मार्गदर्शिका । 
नमोअस्तु गुरुसत्तायै, श्रद्धा - प्रज्ञायुता च या ॥ 

ॐ श्री गुरुवे नमः  

Mar 19, 2015

Feeling Ashamed

Feeling Ashamed !

As I read this news all over Twitter,Facebook and being shared to shame us I could feel the guilt in my heart.

Source: BBC

This will dent the image of Bihar School Examination Board(BSEB), standard of education in Bihar, State Bihar and will affect many lives in coming years.This culture is bad.I must admit, even I have been part of this crime when I helped few of my close friend's sisters, my younger brother.But yes, have never been a part of these kind of visuals and acrobats.Now I realize how bad is this.I feel ashamed.

We never realize the gravity, when we are so surrounded by such events.Cheating in the exam is notoriously rampant in few of the districts in Bihar and near by parts of Uttar Pradesh. I know many students who would enroll in Bihar as well UP to make sure they score better, from where ever it was possible.Police takes bribe to let allow the chits,books and other materials which could of any help to students.Even teachers who are connected to some students favor and help them.

I remember the interesting ways to cheat.We have used some of those tricks when I was in Patna Science College and even in IITs. But what you are seeing in this picture, in news is very real. At some extent the education minister stands correct when he seeks support of teachers, parents and other who are associated with this crime.

Let the government show strong will to correct this.Let rule of law be such that we fear and do not dare such kind of acrobatics to score few unreal marks. The world is very real with challenges. Only grades and scores will not be sufficient to fight, survive and grow as a person. The message and teachings must be on being high on moral and strong in standard.

Meanwhile let's be ashamed and take the blame of being part of this crime and culture !

Feb 27, 2015

Birdman: Why Oscar ?

मित्रों हम लोग फिल्म को समझने का उतना ज्ञान नहीं रखते. इसलिए कई मर्तबा लगता है की या तो ये पुरस्कार देने और चुनने वाले लोग बेवकूफ हैं या फिर हम. इस बार के ऑस्कर में "Birdman" को बेस्ट मूवी चुना गया. मैंने  तड़ाक से डाउनलोड किया और धड़कते दिल से देख लिया।साथ में मेरी घर की प्रधानमंत्री भी थी. अंत तक ये पता नहीं चल पाया की आखिर क्यों ? ऐसा क्या था ? खैर नीरा मुर्ख आम लोग क्या जाने बड़ी बातें ! सोचा देखता हूँ कोई तो सहमत होगा !

Feb 25, 2015

Review: Badlapur

आजकल थोपे हुवे लड़के लड़की भी जबरदस्त एक्टिंग कर रहे हैं. उदहारण के तौर पर "हाईवे" और "बदलापुर" ले लीजिए. वरुण धवन ने कमाल का अभिनय किया है. बढ़िया कहानी है. कहीं से चुराई जरूर सी लग रही है.एक लगभग ऐसी ही फिल्म थी "डेथ सेंटेंस (२००७)" में हॉलीवुड में आई थी. वरुण ने नवाज़ुद्दीन भाई को जबरदस्त टक्कर दी है. नवाज़ुद्दीन की ओछी हरकतों से लबरेज़ एक शातिर किरदार बड़ा प्यारा और खतरनाक है. नवाज़ुद्दीन, मनोज बाजपेई और अपने इरफ़ान खान भाई ऐसे कलाकार हैं जो जान डाल देते हैं अभिनय कहानी और उसके अनोखेपन में. एक बार जरूर देखें. दुबारा भी देख सकते हैं. तिबारा थोड़ा ज्यादा हो जायेगा !