Sep 5, 2015

तस्मै श्री गुरुवे नमः

जब मेरा नवोदय में जाना तय हो गया था, मुझे याद है एक महीने से मेरी माँ रो रही थी.मैं अक्सर रात में पढ़ते पढ़ते सो जाया करता था। फिर वो पानी डालकर या गुदगुदी कर मुझे जगाती थी खाना खिलाने. उसे यही चिंता थी की मुझे कौन जगायेगा खाना  खाने के लिए. लेकिन मुझे गावं और गरीबी से निकलने का अवसर मिला था.मैंने इतनी छोटी उम्र में भी "पेटी " भर लिया था. 6अक्टूबर 1995 को जब आया तो बड़ा अच्छा लगा. पापा को अलविदा कह स्कूल हॉस्टल चला गया.शाम को थावें वालों का पूरा परिवार साथ देने आया था. मेरा अपना परिवार, स्कूल हो गया था. सुन्दर राजकिरण को रोते हुवे देखा तो उसे मनाने और समझाने लगा. रश्मि मैडम सब रोते बच्चों को मना रही थीं. सर लोग भी मना रहे थे। इस तरह सब बच्चों को नया घर-परिवार-मम्मी -पापा मिल गए। यही संसार सुख दुःख और बेहतर बनाने का साथी रहा 2000 तक. आजतक है. जबतक ज़िंदा हैं रहेगा।

मुझे याद है S N झा सर का सबको डांटना फटकारना दुलारना।गीता मैडम, रूपम मैडम,मुकेश सर, का ये चिंता  करना की इस निर्दयी दुनिया में ये भोला बालक कैसे गुजर बसर करेगा ? ! मुझे याद है गीता मैडम और रूपम मैडम को मुझे घसीटते हुवे मेस ड्यूटी पर ले जाना। मुझे वो फल, वो मिठाईयां, वो प्यार और मेरे लिए चिंता याद है. मेरे कांपते हाथों, धड़कते दिल को ढांढस बढ़ाना और सम्भालना याद है. रोना - रुलाना भी याद है. मेरे घर से दूर का वो दूसरा घर संसार याद है जिसने मेरे बाजुओं में इतनी ताक़त, दिल में इतना हौसला, मन में इतने अरमान, ज़िन्दगी में इतने उड़ान दिए। 

लिखता चलूँ तो आंसुओं का समंदर लिख दूँ, प्रेरणा का पर्वत लिख दूँ, प्यार-वात्सल्य का पुराण लिख दूँ। 

गीता मैडम, मुकेश सर, विनय सर, गोपाल सर, बायो सर, आर्ट सर, प्रिंसपल सर, रश्मि मैडम, रूपम मैडम, मेरे प्राथमिक विद्यालय के कमला सर, हाई स्कूल के आलम सर, IIT के समस्त गुरुजन, और बचपन में ऊँगली पकड़ कर चलना सिखाने  वाले, लिखना सिखाने  वाले, बोलना सिखाने वाले  मेरे माता - पिता, आप सबका प्यार, आशीर्वाद है की आज मैं जहाँ भी हूँ और ऊँचा उठने की तमन्ना रखता हुँ. आभार और शाष्टांग नमन !

ॐ गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु :,गुरुरेव महेश्वरः |
गुरुरेव परब्रह्म, तस्मै श्री गुरुवे नमः ||

अखण्डमण्डलाकारं, व्याप्तं येन चराचरम । 
तत्पदं दर्शितं येन, तस्मै श्री गुरुवे नमः ॥ 

मातृवत लालयित्री च, पितृवत् मार्गदर्शिका । 
नमोअस्तु गुरुसत्तायै, श्रद्धा - प्रज्ञायुता च या ॥ 

ॐ श्री गुरुवे नमः  

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